ओ राही मत थक तु मझधार में

माना की मंज़िल नही हे आसान,
माना की जिंदगी लेती हे इम्तिहान,
लेकिन तु मत डर इम्तिहान से,
ओ राही मत थक तु मझधार में।

माना की सामने बोलने वाले हे कम,
और पीछे बोलने वाले हे ज्यादा,
लेकिन मत सोच तु उनके बारे में,
ओ राही मत थक तु मझधार में।

बीच मंज़िल मत थक तु,
पीछहत करने की बात मत सोच तु,
उड़ तु सफलता के आकाश में,
ओ राही मत थक तु मझधार में।

माना की सच्चाई नहीं है इंसान में,
बेचते हैं वो अपना ईमान बाजार में,
लेकिन मत बेच अपना‌ ईमान इस बाजार में,
ओ राही मत थक तु मझधार में।

ये राह नहीं है आसान,
माना की कठिनाईयों का है पहाड़,
लेकिन कुछ नहीं आसान है इस जीवन में,
ओ राही मत थक तु मझधार में।

For the first time in my life, I tried to pen my feelings in my national language. I hope you like this and will forgive any grammatical mistake.

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